भारत में हिंदुत्व की विचारधारा से जुड़े प्रमुख चेहरे कई हैं, लेकिन उनमें एक नाम अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है — प्रवीण तोगड़िया या Pravin Togadia। वह न केवल हिंदू संगठनों में एक सक्रिय नेता रहे हैं, बल्कि अपने मेडिकल करियर में एक सफल कैंसर सर्जन भी रहे। उन्होंने सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी सशक्त आवाज़ और स्पष्ट विचारों के कारण एक अलग पहचान बनाई। यह विस्तृत जीवनी प्रवीण तोगड़िया के जीवन, संघर्ष, विचारधारा, मेडिकल करियर, सामाजिक कार्य और संगठनात्मक भूमिका पर केंद्रित है।
प्रवीण तोगड़िया का प्रारंभिक जीवन और परिवार
प्रवीण तोगड़िया का जन्म 12 दिसंबर 1956 को गुजरात के अमरेली जिले के साजन टिंबा गाँव में हुआ। उनका परिवार एक साधारण किसान परिवार था और वे बचपन से ही ग्रामीण संस्कृति, सामाजिक आदर्शों और सख्त अनुशासन में पले-बढ़े।
उनके पिता खेती करते थे और परिवार में सात भाई-बहन थे। आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, जिसके कारण बचपन कठिनाइयों में बीता, लेकिन शिक्षा और संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाया। बचपन से ही उनमें नेतृत्व की क्षमता, वाकशक्ति और तेज बुद्धि दिखाई देने लगी थी।
जब वे लगभग 10 वर्ष के थे, तब उनका परिवार अहमदाबाद आकर बस गया। यहीं से उनके जीवन की दिशा बदली और वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आए, जिसने आगे चलकर उनके जीवन को पूरी तरह प्रभावित किया।
प्रवीण तोगड़िया का शिक्षा और मेडिकल करियर की शुरुआत
अहमदाबाद आने के बाद प्रवीण तोगड़िया ने अपनी पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया। वह प्रारंभ से ही मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाना चाहते थे। उन्होंने कड़ी मेहनत की और मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त की।
उन्होंने बी.जे. मेडिकल कॉलेज, अहमदाबाद से MBBS और फिर MS (General Surgery) की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्होंने “Surgical Oncology” यानी कैंसर सर्जरी में विशेषज्ञता प्राप्त की, जो एक कठिन और अत्यंत महत्वपूर्ण मेडिकल क्षेत्र माना जाता है।
MBBS और MS पूरा करने के बाद उन्होंने सरकारी हॉस्पिटल में कुछ समय काम किया और फिर कैंसर सर्जन के रूप में स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू की। वे देश के चर्चित और विशेषज्ञ कैंसर सर्जनों में गिने जाने लगे।
उनका मेडिकल करियर लगभग 14 वर्षों तक बेहद सफल रहा। इस अवधि में उन्होंने हजारों कैंसर मरीजों की सर्जरी की और उन्हें नया जीवन दिया।
उनकी चिकित्सा क्षमता, गंभीर मामलों को सँभालने की योग्यता और मानवता के प्रति समर्पण ने उन्हें एक सफल और लोकप्रिय डॉक्टर बना दिया।
प्रवीण तोगड़िया का सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में योगदान
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है।
Pravin Togadia ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया—
- एक हजार से अधिक कैंसर सर्जरी
- जटिल ऑनकोलॉजी ऑपरेशनों में महारत
- गरीब मरीजों का नि:शुल्क इलाज
- अनेक मेडिकल कैंपों का आयोजन
- कैंसर जागरूकता कार्यक्रमों में प्रमुख भूमिका
उनके द्वारा स्थापित “धन्वंतरि कैंसर हॉस्पिटल” ने हजारों मरीजों का इलाज किया।
उनकी पहचान सिर्फ हिंदुत्व नेता के रूप में नहीं, बल्कि भारत के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ के रूप में भी बनी।
प्रवीण तोगड़िया का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव
अहमदाबाद में स्कूल के दिनों में ही प्रवीण तोगड़िया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। वे सुबह शाखा में जाते और समाज सेवा, अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रवाद की शिक्षा प्राप्त करते।
RSS से जुड़े रहने का प्रभाव उनके व्यक्तित्व पर गहरा पड़ा और आगे चलकर यह जुड़ाव उनके सामाजिक और राजनीतिक जीवन की नींव बना।
प्रवीण तोगड़िया का विहिप (VHP) में प्रवेश और उभार
चिकित्सक होने के बावजूद Pravin Togadia का झुकाव सामाजिक-धार्मिक मुद्दों की ओर बढ़ता गया। इसके बाद वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
धीरे-धीरे वे संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचे और—
- गुजरात विहिप महासचिव
- राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव
- अंतराष्ट्रीय महासचिव
- कार्यकारी अध्यक्ष
जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
VHP में रहते हुए प्रवीण तोगड़िया ने हिंदू समाज से जुड़े अनेक मुद्दों को उठाया, जैसे—
- राम मंदिर
- कश्मीर समस्या
- धार्मिक परिवर्तन
- गौ-रक्षा
- जनसंख्या संतुलन
- अल्पसंख्यक तुष्टीकरण
- हिंदू सुरक्षा कानून
उनकी fiery या प्रखर शैली ने उन्हें देशभर के हिंदू संगठनों में एक लोकप्रिय नेता बना दिया।
प्रवीण तोगड़िया का हिंदुत्व विचारधारा और नेतृत्व
Pravin Togadia हिंदुत्व के सबसे मुखर चेहरों में गिने जाते हैं।
वे हमेशा स्पष्ट और बिना झिझक अपनी बात रखते हैं।
उनका मुख्य लक्ष्य—
- हिंदू समाज को संगठित करना
- धार्मिक सुरक्षा
- सांस्कृतिक जागरण
- सामाजिक समरसता
- हिंदू हितों के लिए कानून बनवाना
रहा है।
उनके भाषण, लेख और आंदोलनों ने उन्हें बड़े पैमाने पर लोकप्रियता दिलाई।
उनकी प्रमुख पहलें—
- Hindu HelpLine
- Hindu Nyay Parishad
- धर्म रक्षा आंदोलन
- गरीबों के लिए भोजन व राहत कार्यक्रम
वे हमेशा भारत में हिंदू पहचान को मज़बूत करने की बात करते हैं।
प्रवीण तोगड़िया का राजनीतिक और संगठनात्मक संघर्ष
VHP और अन्य हिंदू संगठनों के बीच नेतृत्व को लेकर समय-समय पर मतभेद भी हुए।
2018 में परिस्थिति इस हद तक पहुँची कि वे संगठन से अलग हो गए।
इसके बाद उन्होंने नया संगठन बनाया—
“अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद (AHP)”
और इसके अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
यह संगठन हिंदू हित, सामाजिक सेवा और राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए कार्य करता है।
प्रवीण तोगड़िया के विवाद और आलोचना
एक प्रखर हिंदुत्व नेता होने के कारण प्रवीण तोगड़िया कई विवादों में भी रहे। उनमें से प्रमुख—
- तीखे भाषण
- धार्मिक मुद्दों पर सीधी आलोचना
- राजनीतिक टकराव
- 2018 में उनका “गायब” होना
- पुलिस द्वारा जारी वारंट
- सरकारी तंत्र पर आरोप
हालाँकि वे कहते हैं कि वे हमेशा कानून के भीतर रहकर काम करते हैं और किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत लाभ नहीं लेते।
प्रवीण तोगड़िया का हिंदू हेल्पलाइन और सेवा कार्य
Pravin Togadia द्वारा शुरू की गई “Hindu HelpLine” आज देशभर में सक्रिय है।
इसके माध्यम से लाखों लोगों को—
- मेडिकल सहायता
- कानूनी सलाह
- आपदा राहत
- सामाजिक सहयोग
मिला है।
उन्होंने कोरोना महामारी, बाढ़ और सूखे के समय बड़े-स्तर पर सेवा कार्य किया।
प्रवीण तोगड़िया का व्यक्तित्व और नेतृत्व शैली
प्रवीण तोगड़िया एक सख्त, स्पष्टवादी, तेज-तर्रार और समर्पित नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। उनकी प्रमुख विशेषताएँ—
- तेज भाषण क्षमता
- मेडिकल बैकग्राउंड
- जमीनी जुड़ाव
- राष्ट्रभक्ति
- जनता की समस्याओं से सीधा संवाद
- मजबूत विश्लेषण क्षमता
उनका व्यक्तित्व लोगों को आकर्षित करता है क्योंकि वे जनसरोकार वाले मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं।
प्रवीण तोगड़िया की वर्तमान स्थिति
आज Pravin Togadia “अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद” के अध्यक्ष हैं और देशभर में हिंदू समाज से जुड़े मुद्दों, सेवा परियोजनाओं और संगठन विस्तार के लिए सक्रिय हैं।
साथ ही, वे मेडिकल क्षेत्र से भी जुड़े हैं और कैंसर से बचाव तथा इलाज के लिए जनजागरूकता अभियान चलाते हैं।
प्रवीण तोगड़िया या Pravin Togadia का जीवन संघर्ष, समर्पण, राष्ट्रवाद, सेवा और नेतृत्व का अनोखा मिश्रण है।
एक ओर वे एक बेहतरीन कैंसर सर्जन रहे, दूसरी ओर उन्होंने अपना जीवन हिंदू समाज के अधिकारों की रक्षा, संगठन और सेवा के कार्यों को समर्पित किया।
उनकी जीवनी हमें यह सिखाती है कि चाहे मेडिकल करियर हो या सामाजिक नेतृत्व — मेहनत, साहस और स्पष्ट दृष्टि से कोई भी व्यक्ति महान कार्य कर सकता है।















